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शनिवार, 28 फ़रवरी 2015

नवरात्री में नवदुर्गा अराधना



नवरात्रि के नौ दिनों में आदिशक्ति जगदम्बा के नौ रूपों की आराधना की जाती है। नवरात्र के प्रथम दिन शैल पुत्री, दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन चन्द्रघण्टा, चैथे दिन कुष्माण्डा, पाँचवे दिन स्कन्द माता, छठे दिन कात्यायनी, साँतवे दिन काल रात्रि, आँठवे दिन महागौरी तथा नवें दिन सिद्धिदात्री के रूप में आराधना किया जाता है।
यदि साधक नवरात्रि के नव दिनों तक माँ दुर्गा के नव रूपों की आराधना शास्त्रीय विधि विधान और पूर्ण निष्ठा, भक्ति के साथ करता है तो साधक को समस्त प्रकार की सिद्धियाँ स्वतः ही प्राप्त हो जाती है।
नवरात्रि के समय माँ दुर्गा की उपासना करने वाले साधकों को एक बात ध्यान देना चाहिए, यदि नव रात्र का प्रथम दिन अमावस युक्त हो तो उस दिन व्रत का अनुष्ठान नहीं करना चाहिए और यदि एकम् तथा द्विज एक ही दिन हो तो अत्यंत शुभ योग होता है।
नवरात्र में माँ दुर्गा की पूजा आराधना के लिए सर्वप्रथम एक मण्डप बनाएँ जो नौ हाथ लम्बा तथा सात हाथ चैडा हो, फिर बीच में एक वेदी भी बनाएँ जो चार हाथ लम्बा चैडा तथा एक हाथ ऊँचा हो। फिर मण्डप को गाय के गोबर से लीप कर ध्वजाओं से सजा लें तथा वेदी पर लाल आसन बिछा कर माँ दुर्गा की मूर्ति स्थापित करें तथा एक कलश की भी स्थापना करें। मण्डप के बीच में एक हवन कुंड भी बना लें।
फिर माँ आदिशक्ति जगदम्बा से प्रार्थना करें कि हे माता आदिशक्ति आप सर्वशक्तिमान हैं और जगत की माता भी हैं। मंै आपकी पूजा आराधना नवरात्रि के अवसर पर यथा शक्ति सम्पन्न करना चाहता हूँ। हे माता आप मेरी सहायता करें और आर्शीवाद प्रदान करें तथा इस पूजा आराधना में होने वाली त्रुटियों को क्षमा करें।
नवरात्र के प्रथम दिन एक, दूसरे दिन दो, तीसरे दिन तीन, इस तरह नव दिनों तक नौ, कुवाँरी कन्याओं का पूजन करना चाहिए । पूजन के पश्चात भोजन कराना चाहिए तथा वस्त्रादि भी दान में देना चाहिए साथ ही साथ माँ नवदुर्गा की उपासना पूर्णं शास्त्रोक्त विधि विधान से करनी चाहिए जिसका पूर्ण विधि विधान पुराणों में वर्णित है।
यदि नवरात्रि के समय नवदुर्गा के नव रूपों की आराधना नहीं कर पाते तो नवार्ण मंत्र की साधना कर पुर्ण लाभ उठा सकते हैं। नवार्ण मंत्र की साधना के लिए कोई लम्बा चैडा विधि-विधान नहीं है। नवार्ण मंत्र में नौदुर्गा के नव रूपों का बीजाक्षरों के रूप में पूर्ण समावेश किया गया है।
नवार्ण मंत्र को मंत्र तथा यंत्र दोनों रूपों में सिद्ध किया जा सकता है। नवार्ण यंत्र के सिद्धि के लिए नौ कोष्टक बनाकर नवार्ण मंत्र को लोम-विलोम रूप में स्थापित करना पड़ता है।
इस यंत्र को लिखने तथा मंत्र को जप करने से सम्पूर्ण सिद्धियाँ प्राप्त हो जाती हंै। नवरात्रि के नौ दिनों में इस यंत्र को नौ हजार बार लिखने से यह यंत्र सिद्ध हो जाता है। 
साधना विधि- नवरात्रि के प्रथम दिन पूजा स्थान में स्नान आदि से निवृत हो कर माँ दुर्गा के चित्र के समक्ष बैठ जायें, फिर एक ताम्र पत्र पर नवार्ण यंत्र खुदवाकर रखें, तत्पश्चात् माँ दुर्गा की षोड़शोपचार से पूजन करें फिर संक्ल्प कर माँ दुर्गा का ध्यान तथा विनियोग करें तथा नवार्ण यंत्र को 1 हजार बार कागज पर लिखें, फिर नवार्ण मंत्र की 11 माला चप करें।
मंत्र- ऐं हृीं क्लीं चामुण्डाय विच्चै।।
इसी प्रकार नौ दिनों यंत्र का निमार्ण तथा मंत्र का जप करें। उसके बाद नित्य 101 बार नवार्ण मंत्र का जप करते रहने से जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में पूर्ण सफलता प्राप्त होती है। इसमें कोई संदेह नहीं। लेखक- प्रदीप गोस्वामी (संपादक- रहस्यों के खोज में, आध्यात्मिक पत्रिका) मो.न.09753640635

शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2015

चोर पकड़ने का चमत्कारिक प्रयोग


ॐ नाहर सिंह वीर हरै कपडे ॐ नाहर सिंह वीर चावल चपड़े सरसों के फक-फक करै सार को छोड़े चोर को पकड़े आदेश गुरू को।
विधी- इस मंत्र को सिद्ध करने का तरीका यह है कि चाँदी का एक सिक्का लें जिसमें छेद न हो, फिर इसे दूध तथा गंगा जल से धोकर धूप, लोबान जलाकर पूजन करें तत्पश्चात् शनि पुष्य नक्षत्र के दिन गोबर से जमीन को लीप कर उस पर सफेद कपड़ा बिछाकर दूध से धोकर सुखाया गया चावल रख कर उसी पर चाँदी का सिक्का भी रख दे फिर लोबान धूप गुगुल जलाकर उक्त मंत्र का 108 बार जप करें। जब प्रयोग करना हो तब या किसी चोर की पहचान करना हो तो उन्ही चावलो पर सात बार मंत्र पढ़ते हुये उसी चाँदी के सिक्के के बराबर चावल तौल कर जिस व्यक्ति पर शक हो उन्हे थोड़ा-थोड़ा चबवा दें। जिसने भी चोरी किया होगा उसके मुह से निश्चय ही खून गिरने लगेगा। (यह प्रयोग अनुभूत तथा प्रमाणिक है)  लेखक- प्रदीप गोस्वामी (संपादक- रहस्यों के खोज में, आध्यात्मिक पत्रिका) मो.न.09753640635

सर्वकार्य सिद्धि शाबर मंत्र प्रयोग

होली की रात्रि में स्नान आदि से निवृत होकर साधना कक्ष में धूप दीप आदि जलाकर गुरू स्थापना तथा गुरू पूजन कर निम्न सर्वकार्य सिद्धि मंत्र का प्रयोग करें।
मंत्र- ॐ नमो सात समुन्द्र के बीच शिला, शिला के ऊपर सूलेमान पैगम्बर बैठा। सुलेमान पैगम्बर के चार मवक्किलतारिया, सारिया, जारिया, जमारिया। एक मवक्किल पूर्व को धाया देव-दानव को बाधिलाया दूसरा मवक्किल आश्रम को धाया भूत-प्रेत बाधि लाया तीसरा मवक्किल दक्षिण को धाया डाकिनी शाकिनी को पकडि लाया चारि मवक्किल चहुँ दिशी धावै। छल छिद्र मोऊ रहन न पावै रोग-दोष को बहावे शब्द साचा पिण्ड काचा। फुरो मंत्र ईश्वरो बाचा।
विधि- उक्त मंत्र का विधि विधान से किया जाना चाहिए। सर्वप्रथम कपड़े के चार पुतले बनाये फिर उन चारो पुतलांे को रात्रि के समय चारों कोनो में गाड़़ दें। तत् पश्चात् धूप-दीप जलाकर उक्त मंत्र का 108 बार जाप करें ऐसा करने से यह मंत्र सिद्ध हो जाता है और आपके सारे कार्य स्वयं सिद्ध होने लगते हैं। लेखक- प्रदीप गोस्वामी (संपादक- रहस्यों के खोज में, आध्यात्मिक पत्रिका) मो.न.09753640635

सिद्ब महाकाली शाबर मंत्र एक मंत्र दस काम


महाकाली शाबर मंत्र अत्यंत दुर्लभ और तीव्र प्रभावशाली है। इस मंत्र को पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ विधि पूर्वक जपकर सिद्ध कर लिया जाये तो साधक की सभी मनोकामनायें पूर्ण हो जाती है, और साधक संपूर्ण सुख, सौभाग्य, ऐश्वर्य एवं धन-धान्य से परिपूर्ण हो जाता है। साथ ही साथ समस्त प्रकार की बाधायें भी स्वतः ही दूर हो जाती है।

इस मंत्र के द्वारा जन कल्याण तथा परोपकार भी किया जा सकता है। साधक इस मंत्र के द्वारा किसी भी बाधाग्रस्त व्यक्ति जैसे भूत प्रेतबाधा, आर्थिक बाधा, नजर दोष, शारीरिक मानसिक बाधा इत्यादि को आसानी से मिटा सकता है। यही नही बल्कि सम्मोहन, वशीकरण, स्तम्भन, उच्चाटन, विद्वेषण इत्यादि प्रयोग भी सफलता पूर्वक सम्पन्न कर सकता है।
प्रयोग विधी:- किसी भी होली, दीपावली, नवरात्रि, अथवा ग्रहण काल में इस प्रयोग को सिद्ध करना चाहिए। सर्वप्रथम निम्न सामग्रीयाँ जुटा लें। महाकाली यंत्र, महाकाली चित्र, कनेर का पीला फूल, भटकटैया का फूल, लौंग, इलायची, 3 निंबू, सिन्दूर, काले केवाच के 108 बीज धूप, दीप, नारियल, अगरबत्ती इत्यादी।
माता काली के मंदिर में या किसी एकान्त स्थान में इस साधना को सिद्ध किये जा सकते हैं।सर्वप्रथम स्नान आदि से निवृत होकर एक लकड़ी के तख्ते पर लाल वस्त्र बिछाकर महाकाली चित्र तथा यंत्र को स्थापित करें तत्पश्चात घी का चैमुखा दिया जलाकर गुरू गणेश का ध्यान कर गुरू स्थापन मंत्र तथा आत्मरक्षा मंत्र का प्रयोग करें। फिर भोजपत्र पर निम्न चैतीसा यंत्र का निर्माण करें तथा महाकाली यंत्र, महाकाली चित्र सहित चैंतीसा यंत्र का पंचोपचार या षोड़शोपचार से पूजन करे।
पूजन के समय कनेर, भटकटैया के फूल को यंत्र चित्र पर चढ़ायें, नारियल इलायची, पंचमेवा का भोग लगायें, फिर तीनों निम्बूओं को काटकर सिन्दूर का टीका लगाकर अर्पित करें तत्पश्चात हाथ में एक-एक केवाच के बीजों को लेकर उक्त मंत्र को पढ़ते हुए काली के चित्र के सामने चढ़ाते जायें इस तरह 108 बार मंत्र जपते हुए केवाच के बीजों को चढ़ायें। मंत्र जप पुर्ण होने पर उसी मंत्र से 11 बार हवन करें। एक ब्राम्हण को भोजन करायें तथा यथाशक्ति दान दक्षिणा दें। फिर इस मंत्र का प्रयोग किसी भी इछित कार्य के लिये कर सकते हैं।
भूत-प्रेत बाधा निवारण:- हवन के राख से किसी भी भूत-प्रेत ग्रस्त रोगी को सात बार मंत्र पढ़ते हुए झाड़ दें तथा हवन के राख का टीका लगा दें फिर भोजपत्र पर चैतिसा यंत्र को अष्टगंध से लिख कर तांबे के ताबीज में भर कर पहना दें तो भूत प्रेत बाधा सदा के लिए दूर हो जाता है।
शत्रु बाधा निवारण:- अमावस्या के दिन एक़़़़़़़़़़़़़़़ लेकर उस पर सिंदुर से शत्रु का नाम लिखकर महाकाली मंत्र का उच्चारण करते हुये 21 बार 7 सुइयां चुभाये फिर उसे श्मशान मे ले जाकर गाड़ दें तथा उस पर शराब की धार चढ़ायें ऐसा करने से 3 दिनों मे शत्रु बाधा समाप्त हो जाती है।
आर्थिक बाधा निवारण:- महाकाली यंत्र के सामने घी का दीपक जलाकर महाकाली शाबर मंत्र का 21 बार जाप 21 दिनों तक करने से आर्थिक बाधा समाप्त हो जाता है।
वशीकरण प्रयोग:- पंचमेवा को 21 बार मंत्रों द्वारा अभिमंत्रित कर जिसे खिला दें वह वशीभूत हो जाता है।
विद्वेषण प्रयोग:- 3 केवाच के बीज कलिहारी का फूल तथा श्मशान की राख को मिलाकर 21 बार मंत्र द्वारा अभिमंत्रित कर जिसके घर के आने जाने वाले मार्ग में गाड़ दें उसका विद्वेषण हो जायेगा।
उच्चाटन प्रयोग:- एक केवाच के बीज भटकटैया के फूल और सिंदुर तीनों को मिलाकर मंत्र द्वारा 11 बार अभिमंत्रित कर जिसके घर में फेंक दे उसका उच्चाटन हो जायेगा।
स्तम्भन प्रयोग:-
तीन लांैग, हवन की राख, तथा श्मशान की राख तीनों को मिलाकर मंत्र से अभिमंत्रित कर जिसके घर में गाड़ दे उसका स्तम्भन हो जायेगा। समंत्र –
सात पुनम कालका, बारह बरस क्वांर।
एको देवि जानिए, चैदह भुवन द्वार।।
द्वि-पक्षे निर्मलिए, तेरह देवन देव।
अष्टभुजी परमेश्वरी, ग्यारह रूद्र सेव।।
सोलह कला सम्पुर्णी, तीन नयन भरपुर।
दशों द्वारी तू ही माँ, पांचों बाजे नूर।।
नव-निधि षट्-दर्शनी, पंद्रह तिथि जान।
चारों युग मे काल का कर काली कल्याण।।
लेखक- प्रदीप गोस्वामी (संपादक- रहस्यों के खोज में, आध्यात्मिक पत्रिका) मो.न.09753640635